विश्व शांति के लिए संवाद ही सर्वोत्तम मार्ग: डॉ. जानी जिग्नेश
अहमदाबाद: अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और हाल के घटनाक्रमों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है। वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों, कूटनीतिक संस्थाओं और शांति समर्थकों द्वारा लगातार यह प्रयास किया जा रहा है कि किसी भी प्रकार के संघर्ष का समाधान बातचीत, समझदारी और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से निकाला जाए। हाल के दिनों में सैन्य गतिविधियों में कुछ कमी देखने को मिली है तथा संवाद की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं।
इस विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. जानी जिग्नेश ने कहा कि विश्व इतिहास इस बात का गवाह रहा है कि युद्ध कभी भी स्थायी शांति स्थापित नहीं कर सकता। संघर्ष और हिंसा केवल विनाश, मानवीय पीड़ा और आर्थिक अस्थिरता को जन्म देते हैं, जबकि संवाद, सहयोग और आपसी विश्वास ही टिकाऊ समाधान का आधार बनते हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी युद्ध का सबसे अधिक प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ता है। युद्ध के कारण लोगों का जीवन प्रभावित होता है, व्यापारिक गतिविधियां बाधित होती हैं, निवेश और विकास की गति धीमी पड़ जाती है तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसे समय में सभी देशों और संबंधित पक्षों को संयम, धैर्य और कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
डॉ. जिग्नेश ने आगे कहा कि आज का युग संवाद, सहयोग और वैश्विक साझेदारी का युग है। यदि राष्ट्र अपने आपसी मतभेदों को बातचीत की मेज पर बैठकर सुलझाने का प्रयास करें, तो न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी स्थिरता और विकास को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी शांति स्थापित करने के प्रयासों को और मजबूत करने की अपील की।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में सभी संबंधित पक्ष सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ेंगे और बातचीत के माध्यम से ऐसा समाधान खोजेंगे, जो क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और आपसी विश्वास को मजबूत करे। उन्होंने कहा कि मानवता के हित में यह आवश्यक है कि संघर्ष की जगह सहयोग और टकराव की जगह संवाद को महत्व दिया जाए।
अंत में डॉ. जानी जिग्नेश ने कहा कि विश्व शांति केवल राजनीतिक आवश्यकता नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की प्रगति और समृद्धि के लिए अनिवार्य शर्त है। इसलिए प्रत्येक राष्ट्र और समाज को शांति, सह-अस्तित्व और संवाद की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए।
— डॉ. जानी जिग्नेश